हर्बल खेती के हब के तौर पर विकसित हो रहा है झारखंड का खूंटी जिला, विदेशी हुए प्रोडक्ट के दीवाने


झारखंड का खूंटी जिला कभी नकस्लवाद  के लिए देश भर में मशहूर था. पर अब समय के साथ धीरे-धीरे इसकी पहचान बदल रही है. सरकारी योजनाओं के विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं के प्रयास से यहां के हालातों में अप्रत्याशित सुधार हुआ है. लोगों को रोजगार के साधन मिल रहे हैं. कृषि क्षेत्र यहां पर आगे बढ़ रहा है. इसका लाभ खास कर यहां के ग्रामीण क्षेत्र के महिलाओं को मिल रहा है. यहां की अधिकांश जमीन उपरी जमीन हैं. जहां पर सिर्फ बारिश में ही खेती करना संभव था. किसानों के पास कम बारिश या बिना बारिश को होने वाले फसलों की जानकारी नहीं थी, इसके कारण जमीन सालोंभर खाली पड़ी रहती थी. उस जमीन का इस्तेमाल नहीं हो पाता था. इसके बाद सरकार और गैर सरकारी संस्था जेएसएलपीएस के सहयोग से यहां पर औषधीय पौधों की खेती पर जो दिया गया. ऐसे पौधे लगाये गये जो कम पानी में और उपरी जमीन मे बेहतर परिणाम दे सकें. इसका असर भी दिखा और खूंटी की पहचान अब बदल रही है. यहां से हर्बल उत्पाद की मांग विदेशो से भी आ रही है, क्योंकि यहां के उत्पाद की गुणवत्ता काफी अच्छी होती है. जिसका सीधा लाभ यहां के लोगों को मिल रहा है. उनके पास रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं.

 

 

खूंटी में इतने एकड़ में होती है खेती

खूंटी की पहचान बदलने के लिए औषधीय पौधे जैसे लेमन ग्रास, पामा रोजा,वेटीवर और तुलसी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. आज के समय में कई निजी किसान, सरकारी संस्थाएं और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा यहां पर हर्बल पौधों की खेती करायी जा रही है. जेएसएलपीएस की जोहार परियोजना के तहत यह कार्य हो रहा है. जोहार परियोजना द्वारा टीवी 9 को दिये गये आंकड़ो के मुताबिक यहां पर 311 एकड़ क्षेत्रफल में लेमन ग्रास की खेती की जा रही है. इसके अलावा 10 एकड़ में पामा रोजा की खेती हो रही है, पांच एकड़ में वेटीवर लगा हुआ है, जबकि 20-30 एकड़ में तुलसी की खेती की जा रही है. इनसे तैयार उत्पाद देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों में भी भेजी जा रही है.

 

 

किसानों की बढ़ी कमाई

पहले जिन किसानों के खेत खाली पड़े रहते थे, जो खेती नहीं कर पाते थे, आज हर्बल खेती के माध्यम से उनकी आय बढ़ी है. खूंटी जिला में लगभग 2500 किसान इसकी खेती से जुड़े हुए हैं. इन किसानों की आय में साला 30-50 हजार तक बढ़ी है. इसमें अधिकांश महिला किसान हैं, जो खेती करने के बाद पौधों के अलग-अलग उत्पाद बनाती हैं. जेएसएलपीएस के माध्यम से उन उत्पादों को बाजार में अच्छे दाम पर बेच जाता है. किासानों को छूट है की अगर वो चाहें तो खुले बाजार मेंभी अपने उत्पाद बेच सकते हैं.

 

 

प्रोसेंसिग प्लांट लगने से हुई आसानी

महिलाओं के उत्पाद को सीधा उनके खेत से बाजार तक भेजने की व्यवस्था करायी गयी है. खेत में ही प्रोसेसिंग प्लांट बनाया गया है, जहां पर तेल निकाला जाता है. फिर इसे बाजार में बेचा जाता है. इस तरह से महिलाएं अपने उत्पाद में वैल्यु एडिशन करती है, जिसका उन्हें लाभ मिलता है. कुछ युवा किसान भी हैं जिन्होंने अपने खेतों में ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट लगाया है. कई नीजि कंपनियां उनसे उत्पाद खरीदकर एक्सोपोर्ट करती है. इसका लाभ किसानों को मिल रहा है. इस तरह से खूंटी की पहचान हर्बल हब के तौर पर हो रही है.

 

 

SOURCE: TV9HINDI

 

https://www.tv9hindi.com/agriculture/crop-special/jharkhand-agriculture-herbal-farming-in-khuti-changing-lives-and-identity-of-khuti-in-india-and-world-920823.html